सजीव अंत - चले जाने के बाद भी !
सीमित है समय
जितनी चलनी है जीवन लय
पर याद रहूँ मैं सदा जाने के बाद भी,
इसीलिए कुछ करना चाहता हूँ जीते हुए
और जाने के बाद भी !
क्या मेरा कोई अंश रहेगा मेरे जाने के बाद भी?
निश्चय ही! मेरी संतान, मेरा परिवार
पर कुछ और जिंदा रहूँ जाने के बाद भी!
नहीं! मुझे किसी कृत्रिम मशीन से बाँध,
सांसों के कोल्हू में मत जोतना,
अपितु मेरा शरीर वो भूमि हो
जिसमें जीवन का बीज उगे
सांसों के कोल्हू में मत जोतना,
अपितु मेरा शरीर वो भूमि हो
जिसमें जीवन का बीज उगे
इसीलिए है ये मेरी दैहिक वसीयत
और इस वचन को निभाना
मेरे जाने के बाद भी!
मेरी दृष्टि उसे देना
जिसने कभी सूर्योदय की पहली किरण नहीं देखी,
नवजात शिशु की मुस्कान को नहीं देखा
प्रेयसी की आँखों में
प्यार के उफान को नहीं देखा।
मेरा हृदय उसे मिले
जिसके ह्रदय में केवल पीड़ा हो।
मेरा रक्त उस किशोर को देना
जिसका रक्त रिस गया हो,
पर कन्धों पर भविष्य का बीड़ा हो।
मेरे गुर्दे
दो लोगों को,
मशीनों की साप्ताहिक रंगदारी से मुक्त करें,
मेरी हड्डियाँ, मांसपेशियां, नस-नस,
किसी अपाहिज के दौड़ने को प्रयुक्त करें।
मेरे मस्तिष्क के हर कोने को ढूंढ डालना,
मेरे रोम रोम से कोई कोशिका निकालना,
की किसी मूक बालक के मूंह से कोई स्वर तो फूटे,
किसी बधिर कन्या के सन्नाटे का बाँध तो टूटे।
फिर भी कुछ बच जाए
तो वो धरती को उपजाए,
जहाँ फूल मुस्कुराएं,
और गेहूं की बालियाँ लह-लहाएं।
और फिर भी आवश्यक हो मुझे भस्म करना,
तो भस्म करना,
मेरी त्रुटियाँ,
मेरी कमज़ोरियाँ,
मेरे भेद-भाव।
मेरे पापों को नष्ट करना, मेरे शरीर को नहीं,
अपने अंगों से औरों में जीवित रहूँ यहीं
नवजात शिशु की मुस्कान को नहीं देखा
प्रेयसी की आँखों में
प्यार के उफान को नहीं देखा।
मेरा हृदय उसे मिले
जिसके ह्रदय में केवल पीड़ा हो।
मेरा रक्त उस किशोर को देना
जिसका रक्त रिस गया हो,
पर कन्धों पर भविष्य का बीड़ा हो।
मेरे गुर्दे
दो लोगों को,
मशीनों की साप्ताहिक रंगदारी से मुक्त करें,
मेरी हड्डियाँ, मांसपेशियां, नस-नस,
किसी अपाहिज के दौड़ने को प्रयुक्त करें।
मेरे मस्तिष्क के हर कोने को ढूंढ डालना,
मेरे रोम रोम से कोई कोशिका निकालना,
की किसी मूक बालक के मूंह से कोई स्वर तो फूटे,
किसी बधिर कन्या के सन्नाटे का बाँध तो टूटे।
फिर भी कुछ बच जाए
तो वो धरती को उपजाए,
जहाँ फूल मुस्कुराएं,
और गेहूं की बालियाँ लह-लहाएं।
और फिर भी आवश्यक हो मुझे भस्म करना,
तो भस्म करना,
मेरी त्रुटियाँ,
मेरी कमज़ोरियाँ,
मेरे भेद-भाव।
मेरे पापों को नष्ट करना, मेरे शरीर को नहीं,
अपने अंगों से औरों में जीवित रहूँ यहीं
चले जाने के बाद भी!
याद रहूँ मैं सदा जाने के बाद भी
इसीलिए कुछ करना चाहता हूँ जीते हुए
और जाने के बाद भी !!
(Robert Noel Test के अंग्रेजी लेख "To remember me" से रूपान्तरित )
link to original writing:
http://journeyofhearts.org/kirstimd/remember.htm
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