Wednesday, September 10, 2014

A Martyr's epistle

मेरी शौर्यगाथा को मेरी मृत्यु न बनाओ दोस्तों,
आज तुम आंसू न बहाओ दोस्तों!

मुझे जो कन्धों पे उठाया है आज,
मेरी विजय का उत्सव मनाओ दोस्तों
इसे न मेरी शव-यात्रा बनाओ दोस्तों!
आज तुम आंसू न बहाओ दोस्तों!

तुम्हारे जीवन में, तुम्हारे उल्लास में,
जीवित हूँ मैं सदा,
मेरे जीवन को न इतना छोटा बनाओ दोस्तों,
आज तुम आंसू न बहाओ दोस्तों!

*"कन्धों से मिलते हैं कंधें, क़दमों से कदम मिलते हैं,
चलते हैं जब हम ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं,"
चलो, जीत का जश्न  मनायो दोस्तों,
आज तुम आंसू न बहाओ दोस्तों!

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मेरी शहादत को न मेरी कज़ा बनाओ दोस्तों,
आज तुम अश्क़ न बहाओ दोस्तों!

मुझे जो काँधों पर  उठाया है आज,
मेरी फतह का जश्न मनाओ दोस्तों,
इसे  न मेरा जनाज़ा बनाओ दोस्तों,
आज तुम अश्क़ न बहाओ दोस्तों!

तुम्हारी बेख़ौफ़ ज़िन्दगी में ज़िंदा हूँ मैं,
मेरी कुर्बानी को न सज़ा बनाओ दोस्तों,
आज तुम अश्क़ न बहाओ दोस्तों!

बेशक तुम मायुस  हो,
मुझसे जुड़ा होकर,
पर इसे न दिल से लगायो दोस्तों,
आज तुम अश्क़ न बहाओ दोस्तों!

पैरहन हो हंसी का,
और जियो बेइन्तहां,
मेरी मौत को
पैगम्बर ज़िन्दगी का बनाओ दोस्तों,
आज ये करिश्मा कर दिखायो दोस्तों,
आज तुम अश्क़ न बहाओ दोस्तों!

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Let not the tears sog your cheek,
let not my gallantry be my death so meek!
Be it my victory lap
Your shoulders that I am on,
let it not be
an obligatory funeral moan,
Jubilate for that I am alive,
In your fearless life
I continue to survive,
Wear a smile and live, live more,
for it's the vigor of life
even in my death
that I adore!

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