Saturday, July 23, 2022

Life in his eyes

It is finite

the time that we get together!

It is life

the spark that ignites when we are together!

It is a flint stone

when your touch brings out the life 

There would always be life

the spark of life 

life in his eyes

whenever the flint stone is there to touch

in spite of the finitude

the breath may get exhausted

but never the life

the life in his eyes

the life in his eyes that you see

the reflection of life in his eyes

it will be there, forever for you!!


Saturday, June 11, 2022

किश्ती

कहीं से पकड़ूँ तो कहीं से रिसती है 

हर किनारे को छोड़ सिर्फ धारा में बस्ती है 

जाने कौन से सफर पे 

ये मेरी कश्ती है!!

 

naam uska

क्षमता हमारे विवेक की 

मानव जो भी हैं, हर एक की 

यही है 

की जानने को कुछ भी 

निराकार या साकार 

भाव या रूप 

उसे एक नाम चाहिए 

और उस विचार को 

किसी और तक पहुँचाने के लिए भी 

एक नाम चाहिए!

नाम उसे भी चाहिए 

जो सब कुछ है!

अति-सूक्ष्म से बृहद-व्यापक है 

चल-अचल, जड़-चेतन,

आदि-अनंत, 

मूढ़ से चेतना तक 

विचार से शब्द तक 

कुछ नहीं से सब कुछ तक 

उसे भी नाम चाहिए!

उसको पहचानने को,

उसके सिमरन को 

उससे शिकायत को 

उसे याद रखने को 

उसे भूल जाने को 

नाम चाहिए !

जिस भाव में, जिस रूप में 

देखते हैं 

वही उसका नाम हो जाता है !

क्योंकि सब कुछ वही है 

तो हर नाम उसी का है 

पर कुछ नाम बहुत पावन हैं 

शुद्ध अंत:करण को करते हैं 

जब हम उनको स्मरण करते हैं !



 

Tuesday, November 16, 2021

नर में नारायण

हर पल, हर क्षण चरित्र बदलते हैं 
कभी कितने सबल, कितने सक्षम 
मानो हर वरदान मुट्ठी में लिए चलते हैं, 
समेटे कलायें सारी, वो विराट रूप, 
वो नरसिंह अवतार से दीखते हैं!
कभी कितने निरुपयोगी, कितने क्रिया-हीन हैं 
मानो शेषशैय्या पर चिर निंद्रा में विलीन हैं! 
कभी तुलसीवन में एकाकी, श्रापित सालिग्राम से जड़, दोषी नज़र आते हैं 
और कभी उसी वृन्दावन में 
रात को अनेक प्रतियाँ बना किवदंत रास रचाते हैं, 
वो नृत्य जो हरी-श्रृंगार के फूल से हैं,
रात को खिलते हैं, महकते हैं, 
पर उजाले में अंतर्ध्यान हो जाते हैं 
और कभी फलीभूत न होते!
केवल मनुष्य हो कर 
भला इतने रूप कैसे ले पाते हैं,
हम सभी तो नारायण हैं 
बस अलग-अलग नाम से जाने जाते हैं !!

Wednesday, August 18, 2021

Happy Birthday to the perfect Dad!

एक मानव क्या दे सकता है 

बहुत कुछ!

केवल सोच से संकुचित है !


एक मानव क्या दे सकता है 

दुसरे मानव को 

और यदि दूसरा मानव 

उसका ही शिशु हो तो?

तो वो एक सोच दे सकता है 

वो सोच जो संकुचित न हो!


संस्कार दे सकता है 

संस्कार अच्छे जीवन मूल्यों के

संस्कार खुश रहने के 

संस्कार दूसरों की ख़ुशी में खुश रहने के!


सादगी दे सकता है 

सादगी विचारों की 

सादगी जिसमें क्षमा निहित है 

क्षमा-याचना किसी अपनी भूल पर 

और क्षमा-दान किसी और की  त्रुटि पर!


क्षमता दे सकता है 

क्षमता सही निर्णय लेने की 

क्षमता सुधार करने की 

सुधार परिस्थिति में, 

सुधार स्वयं में 

सुधार अन्यों में !


विनय दे सकता है 

विनम्रता दे सकता है 

सबल हो कर विनीत होना 

समर्थ हो कर विनम्र होना 

और विषम स्थितियों को स्वीकार करना 

ये सब दे सकता है!


वो जिसने सब दिया 

संस्कार, सादगी, क्षमता और विनम्रता 

और भी बहुत कुछ,

वो विलक्षण व्यक्ति 

जिसकी सोच में संकोच नहीं 

वो आप हैं !

आप को ऐसे जीवन, ऐसी जीवन शैली 

और ऐसे जीवन मूल्यों के लिए बधाई!

ईश्वर आपको दीर्घायु करे!!



Friday, June 18, 2021

गुंडागर्दी भगवान की!

 गुंडागर्दी भगवान की!

जबसे पैदा हुआ 
डरा के रखा!
अगर कुछ पाना है 
तो पूजा करो 
गर सलामती चाहते हो 
तो झुको, हाथ जोड़ो 
ख़ुशी चाहिए 
तो चढ़ावा चढ़ाओ 
फूल चढ़ाओ!

और जब मिल गया 
तो फिर शुक्राना दो 
नहीं तो छीन लिया जायेगा 
या दंड मिलेगा!

और ये सब करके भी नहीं मिला 
तो तुम्हारी शिद्दत में कमीं थी, 
तुमने पूरी आस्था से नहीं किया 
तुमने कर्म तो किया ही नहीं!

नहीं मिलने पर अगर सोचा 
कि ये सब तो व्यर्थ है 
तो परेशानी खड़ी कर दी जाएगी 
सब अस्त-व्यस्त कर दिया जायेगा 
अपने भविष्य के लिए 
भक्ति जारी रखो 
जो दिया है 
उसके लिए शुक्रगुज़ार रहो 
तुम ज़िंदा हो 
इसके लिए खुश रहो 
और सेवा करो!

सच्चे मन से मांगी दुआ भी पूरी न हुई,
तुम उसके काबिल ही न थे 
कर्मों का फ़ल है 
अपनी औकात से ज़्यादा माँगा!

अब तुम्हें अपनी जान की भी परवाह नहीं ?
जान तो एक दिन जानी है 
तो फिर क्यों करें ये इल्तजा 
तुम्हारी नस्ल के लिए 
तुम्हारी औलाद के लिए 
उनकी सलामती के लिए 
उनकी खुशहाली के लिए !


अपनी ज़िन्दगी के आग़ाज़ से अंजाम तक 
डर के रहो 
डर के जियो 
इबादत करो 
कोई कहीं बैठा तुम्हें आंक रहा है 
तुम्हारे मन के गोदाम में भी झाँक रहा है 
कोई ख्याल भी ज़हन में बिगड़ा 
तो वो अंक काट लेगा 
और तुम्हारे कितने अंक है 
इसका इल्म न होगा  
मौत तक 
और शायद कज़ा के बाद भी 
करो ये यकीन 
की  उसकी ही महर  से 
ग़म है , और होते हो शाद भी 
ता उम्र तौहीद परस्त  रहो 
नफ़ा -नुक्सान  अनदेखा करो 
बस यकीन करो 
उसकी  रूहानी ताक़त पर 
होने पर बर्बाद भी!



Friday, June 11, 2021

मैंने खुद चुना था

"With great power comes great responsibility!" - 'Uncle Ben: Spiderman'


मैंने खुद चुना था 

ये ही तो मेरी आकांक्षा थी 

वो श्रेय, वो सम्मान 

वो ही तो मेरा स्वप्न था !


मैंने खुद चुना 

मैं ढोना चाहता था ये भार 

था मैं तैयार 

ले जायूँगा इस पार 

से उस पार 

लोग मेरी नाव में चढ़ते गए 

और मैं उन्हें पार लगाता रहा 

लोग भी खुश थे 

मुझे भी चाव आता रहा !


फिर कुछ ऐसा हुआ 

जो सोचा न था 

कोई सवारी चढ़ी 

पर वो रस्ते में ही डूब गयी 

मेरी नाव भी डूबने लगी 

किसी तरह नाव बचाई 

किसी तरह जान बचाई 

उस लाश को भी पानी से निकाल लिया 

सोचा लाश तो किनारे लगा दूँ 

जब किनारे नाव लगी 

मैंने वो लाश उतार सम्बन्धियों को दी 

और वो उसे उठा चले गए 

पर फिर पाया की लाश तो मेरी नाव में ही थी,

फिर उतारा

लेकिन फिर नाव में ही पाया 

जितना भी उतारा, लाश नाव में ही रही

फिर मैं उसके साथ ही सफर करने लगा 

फिर लोगों को पार उतारने लगा 

मेरी नाव में 

कुछ लोगों को वो लाश नज़र आती 

कुछ को नहीं !

फिर यही हादसा दोबारा हुआ 

और फिर हुआ 

और फिर हुआ 

मैं भी नाव में लाशों को ढो चलता रहा 

नाव का वज़न बढ़ता गया 

मैंने खुद चुना था 

मैं ढोना चाहता था ये भार 

था मैं तैयार 

ले जायूँगा इस पार 

से उस पार 

इन लाशों को 

कुछ लाशें मेरे अपनों की थीं 

बैठे थे बड़े शौक़ से, 

डूब गए रस्ते में ही

जो बैठे थे बड़े यकीन से !


अब हम सफर करते हैं 

मैं और मेरी लाशें,

ये लाशें कभी 

उँगलियाँ नहीं उठातीं 

लगता है 

ज्यों मुझे देख हैं मुस्कुरातीं,

उँगलियाँ तो ये लहरें उठातीं हैं 

उँगलियाँ तो ये किनारे उठाते हैं 

ये हवायें उठातीं हैं 

ये किरणें उठाती हैं 

इसलिए अब मैं

सिर्फ अपनी लाशों से वास्ता रखता हूँ 

इनके ही साथ सफर करता हूँ !


हाँ, एक दिन 

मेरी नाव खाली होगी 

इसमें कोई लाश नहीं होगी 

या सिर्फ एक होगी !

जब ये अपने वज़न से डूब जाएगी 

तब ही ये अपने श्राप से उबर पायेगी 

मैंने खुद ही चुना था 

ये ही तो मेरी आकांक्षा थी 

वो श्रेय, वो सम्मान 

वो ही तो था मेरा वरदान 

श्राप बन जायेगा 

था मैं इससे अनजान!


अभ भी बहुतों को 

मेरी शापित नाव पर यकीन है 

मुझे भी है,

खे रहा हूँ ,

एक पतवार जो वरदान है 

दूसरी जो अभिशाप है 

चलती है नाव,

नाव के संग मैं, मेरी लाशें 

और वो लोग जो पार उतरना चाहते हैं,

और वो लहरें, वो किरणें 

वो हवायें, वो किनारे 

सब चलते हैं 

साथ 

क्योंकि मैंने खुद चुना था

मैंने खुद ही तो चुना था!


 

Success quote

Success is often like a magic trick, you dont see the preparation and hard work behind!!