Thursday, January 12, 2017

मात्र एक बेटी!

मात्र एक बेटी!

क्यों कर बेटियों को एक पदक लगता है
कहने को हमारी,
क्या पर्याप्त नहीं इनके निश्छल मुख की
मुस्कान वो प्यारी,
क्यों परस्पर इन्हें खुद को
प्रमाणित करना होता है,
कलयुग की इन अग्नि-परिक्षायों
से बारम्बार तरना होता है,
यदि इनमें कुछ ख़ास न हो,
कोई कला इनके पास न हो,
रोशन न ये नाम करें,
बड़ा न कोई काम करें,
तो न लाड़-दुलार करें?
लज्जित ऐसा विचार करे!!

क्यों  गीत गायें केवल 
जब तू हमें गर्वित करे,
कदाचित तेरी विजय से अपने लाभ तक
सेतु हम निर्मित करें,
तुझे कुछ देने में भी
कुछ प्राप्त करना चाहते हैं,
अपने अहम् के समक्ष
तेरी हर उपलब्धि
समाप्त करना चाहते हैं !

क्यों  गीत गायें केवल 
जब तू हमें गर्वित करे,
तेरा स्नेह तो निरंतर
मुझे द्रवित करे,
तेरा अबोध मुख
देता तीनों लोकों का सुख,
तेरी मुस्कान की हर कला
करे मेरे रोम-रोम
का भला,
तेरा हर संबोधन
दे ख़ुशी तीनों प्रहर मुझे
तेरा आभास
दे निशीथ लहर मुझे!

तेरा होना मात्र,
प्रकृति की एक सिद्धि है,
तू ही तो इस शाश्वत सृष्टि की
मानुषिक अभिव्यक्ति है
किन्तु क्यों मैं तोलूं तुझे
बृहत् तुला में,
जब पाता सभी आनंद
केवल तुझे बाँहों में झुला के,
किसी उपाधि की कमी
कर  नहीं सकती अधूरा तुझे,
लक्ष्मी, सरस्वती
नारी-नारायणी,
देवी, जननी
या फिर तरणि,
किसी उपाधि की कमी
कर  नहीं सकती अधूरा तुझे,
केवल बेटी होकर
करती तू पूरा मुझे!
केवल बेटी होकर
करती तू पूरा मुझे!!

Thursday, December 22, 2016

VM newschannel

Vyarth malhotra"namaskar, Aaj ki sabse badi khabar jo dil dehla dene wali hai aayiye us par nazar daalte hain. Aaj 'bhindiyan against water-melon' yani ki BAW party ki meeting main regress party ke ek ghuspaithiye ne joote se ghatak hamla kiya. BAW ke chief Ungrind Kesaridal ke bal, bal bal bache. AAyiye hum aapko ghatna sthal par le chalte hain jahan hamare samwad data chipak dorasssiyan chipke hue hain"
Vyarth "Haan, Chipak, batayiye aaj kya hua"
Chipak waiting in anticipation.
VM"kya hamari awaz aap tak pahunch rahi hai, lagta hai ye sarkar ki tarah mehsoos kar hain, hamari awaz in tak nahin pahunch rahi"
Chipak making certain movements of mouth.
VM " Chipak ab aapki awaz hum tak nahin pahunch rahi"
Chipak"Nahin maine to abhi kuchh bola hi nahin, main to apna khana khatam kar raha tha"
VM " To Chipak humein batayein aaj kya hua"
Chipak "namaskar, Aaj ki sabse badi khabar jo dil dehla dene wali hai aayiye us par nazar daalte hain. Aaj 'bhindiyan against water-melon' yani ki BAW party ki meeting main regress party ke ek ghuspaithiye ne joote se ghatak hamla kiya. BAW ke chief Ungrind Kesaridal ke bal, bal bal bache."
VM "ye to main bol chuka hoon, aap apni script sunayein"
Chipak " to aayiye nazar dalte hain us mahan joote par jo ki koi sadharan joota nahin hain. yeh hai woh joota. ise gaur se dekhiye, kya ye masoom dikhne wala joota kisi ko ghayal kar sakta hai. Ise aur karib se dekhiye, kya ye joota nikki ka hai, ya rebhaunk ka hai, ya phir ye bhata ka hai. iski jaankari prapt karne ke liye humne bhata company ke malik jwarbhata se baat ki.
"haan ji jwar bhata ji aapka kya kehna hai?
" Ji hamara is hadse se koi lena dena nahin hai'
" kya ye joota aapki company ka hai"
"Ji humne is kism ke joote 2009-2011 ke beech banaye lekin hamara joota kisi bhi party ke log matr kuchh rupye aur 95 paise mein kharid sakte hai, hume kisi vishesh party ke liye kisi joote ka nirman nahin kiya'
'95 paise kyon"
" woh hamara totka hai
"sale badhane ka?"
"nahin, logon ko bewakoof banane ka"
"aapko kya lagta hai kya ye joota apki company ka ho sakta hai"
"is samay kuchh bhi kehna theek nahin, abhi humein apne records check karne honge lekin ye baat saf hai ki is ghatna main hamara koi haath nahin hai, isme kya hamara kisi bhi ghatna mein koi haath nahin hai"
" aap aisa kaise keh sakte hain"
" kyunki joota hum sirf pairon ke kiye banate hain, naki haath ke liye. Isme rebhaunk company ka haath ho sakta hai, wo gloves bhi banate gain"
Chipak" jaisa ki aapne dekha jwarbhata ji naye joote ki tarah saaf bach kar nikal gaye aur rebhaunk company par ilzaam madh diya. Aaiye abh aapko rebhaunk company ke maalik shri Tommy bowie se milwate hain"
Tommy' bow wow"
Chipak ' Ji aap bhaunk kyon rahen hain"
 Tommy " bow wow"
Chipak" app phir bhaunke"
Tommy "ji nahin, do baar bhaunkne ki awaz, ye hamari signture tune hai, hum rebhaunk hai na"
Chipak "aapka is ghatna ke baare mein kya kehna hai?"
Tommy " Ghatna bahut kharab hai, hum sirf badhne mein vishwas karte hain, aap hamari sales figure utha ke dekhiye, hamesha badhti hain, kabhi ghatti nahin"\
Chipak " aapka is joote ke baare mein kya kehna hai"
Tommy " ye joota, hamara nahin hain, humne apne joote pehan rakhe hain"
Chipak " par is joote par apka logo hai?"
Tommy " Logon ka kya hai, kuchh to log kahenge, logon ka kaam hai kehna!"
Ch " Logon nahin, logo, symbol"
Tommy " Logo, arre, airport mein kitne haath bane hain, to kya woh kisi party ka ho gaya, aur fir logo to duplicate bhi ho sakta hai'
Ch " lekin apki signature tune hai bow wow aur party ka naam hai 'BAW', isliye hamein yakeen hai, aap bhi is haadse se jude hue hain"
Tommy kuchh bolta hai par audible nahin hai!
Vyarth malhotra "Lagta hai satellite problem hai, to aapne dekha ki sabse pehle hamare channel ne 'breaking news' mein news to tod marod kar ye saabit kar diya ki iss mamuli dikhne wale ghatna kram ke peeche bade bade industrialists ka haath hai, ab dekhna ye hai ki 'BAW' ka agla kadam kya hoga, aayiye unke spokesperson se baat karte hain jo hamare studio mein upasthit hain"
" namaskar, ab apka agla kadam kya hoga?"
"ji, agla kadam lene se pehle hamein doosra joota dhoondhna hoga"
"ye pata lagane ke liye ki joota kiska tha??"
"nahin, ek joota pehan kar kitni door jaayenge!"


Sunday, November 13, 2016

वायु प्रदूषण का सामना कैसे करें: चिकित्सा विशेषज्ञों के सुझाव: न हो साँस में संत्रास, हो ज़िन्दगी बेहतर हर स्वांस !!

वायु प्रदूषण का सामना कैसे करें:  चिकित्सा विशेषज्ञों के सुझाव

न हो साँस में संत्रास, हो ज़िन्दगी बेहतर हर स्वांस !!


डॉ. देश दीपक, डॉ. नितीश डोगरा, डॉ. रवि मेहर, डॉ. मनीष बंसल और डॉ. आनंद कृष्णन द्वारा निजीस्तर पर जनहित में जारी

स्मॉग क्या है?
स्मॉग शब्द स्मोक और फॉग दो शब्दों से मिलकर बना है । वायु में बादल के रूप में फैली पानी की छोटी-छोटी बूंदों के समूह को फॉग कहते हैं । यह स्वयं में हानिकारक नहीं होता क्योंकि इसमें कोई दूषित तत्व नहीं होते । किन्तु, जब फॉग, धुआँ अथवा अन्य दूषित तत्व वायु में मिल जाते हैं तो वातावरण में धुंधलापन आ जाता है, इसे स्मॉग कहते हैं । सबसे बड़ी बात यह है कि तब यह वायु मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक हो जाती है । 

यह मेरे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक क्यों है?
वायु में मिश्रित धुएँ में स्थूल (मोटे) एवं सूक्ष्म (बारीक) कण होते हैं। वायु की गुणवत्ता को मापने के लिए इन कणों के अतिरिक्त अन्य विभिन्न दूषित कणों का आकंलन किया जाता है, जिसे 'एयर क्वालिटी इंडेक्स'  (AQI) कहते हैं। हवा में मिश्रित सूक्ष्म कण अथवा पी एम 2.5 मानव स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव डालतें है । ये अत्यन्त छोटे-छोटे कण होते हैं जिनका आकार 2.5 माइक्रोन अथवा इससे भी कम होता है । ये आकार में इतने छोटे होते हैं कि छोटे से छोटे वायुमार्ग द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और रक्त में मिलकर हृदय और मस्तिष्क जैसे शरीर के अन्य भागों को नुकसान पहुँचाते हैं । वर्तमान समय में इस वायु में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए इमरजेंसी की तरह है । कहा जा सकता है कि अगर कोई व्यक्ति दो घन्टे तक खुले वातावरण में रहता है तो कम से कम 1 सिगरेट पीने के बराबर धुआँ उसके शरीर में सांस द्वारा चला जाता है।
  
वायु प्रदूषण के अल्पकालिक (तुरंत होने वाले)दुष्प्रभाव कौन से है

प्रदूषित हवा में सांस लेने से उपर्युक्त लक्षणों के अलावा नाक, आँख एवं गले में खारिश होना, आँखों में लाली, पानी आना, खांसी होना, छींके आना, नाक बहना, सांस फूलना जैसी शिकायत हो सकती हैं । यह देखा गया है कि वायु प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ जाने के कारण अस्पतालों के आपातकालीन विभाग में आने वाले और भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या में भी काफी वृद्धि होती है। 


वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक (लंबे समय में होने वाले) दुष्प्रभाव क्या है?
वायु प्रदूषण के दीर्घ कालिक दुष्प्रभाव के रूप में होने वाले रोगों में  साँस संबंधी रोग जैसे  दमा (अस्थमा और ब्रॉन्काइटिस), फेफड़ों का कैंसर, हृदयरोग और स्ट्रोक (लकवा) प्रमुख हैं । हाल ही में किए गए अध्ययनों के अनुसार वायु प्रदूषण से मानसिक रोग, मधुमेह, अवसाद और जोड़ों के विकार होने के अलावा बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है ।

विशेष रूप से किन लोगों को ज्यादा खतरा है?
सांस एवं हृदय संबंधी रोगों से पीड़ित व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और ऐसे व्यक्ति जो लम्बे समय तक घर से बाहर रहते हैं, वायु प्रदूषण से उन्हें ज्यादा खतरा होता है ।

किस स्तर का वायु प्रदूषण मेरे लिए असुरक्षित है
PM 2.5 का स्तर 60 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर और AQI का स्तर 100 से कम होना चाहिए । वर्तमान परिस्थिति में ऐसे व्यक्ति जिनको वायु प्रदूषण से ज्यादा खतरा है (उपरोक्त) उन्हें घर पर ही रहना चाहिए। यदि PM 2.5 210 से अधिक या AQI  300 से अधिक हो तो घर से बाहर निकलते समय ऐसे लोगों को मास्क पहनना चाहिए । सामान्य लोगों के लिए वायु प्रदूषण का असुरक्षित स्त्तर लगभग 250 (PM2.5) और 400 (AQI) है ।

वायुप्रदूषण के स्तर को हम कैसे समझ सकते हूँ?
वायु प्रदूषण के स्तर को निम्न टेबल द्वारा समझा जा सकता है 

डोगरा – हृको असेसमेंट टूल

श्रेणी
वायुगुणवत्ता
इंडेक्स
 (AQI )
PM 2.5
(24 घंटे का औसत) माइक्रोन/मी. क्यूब 
स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव एवं बचाव के उपाय
अच्छा
0-100
0-60
वायु प्रदूषण से बहुत कम अथवा न के बराबर दुष्प्रभाव, बचाव के उपायों की आवश्यकता नहीं
मध्यम
101-200
61-91
संवेदनशील वर्ग
स्वास्थ्य पर ध्यान दें, लम्बे समय तक खुले वातावरण में रहने या भारी काम करने से बचे ।
आम जनता
वायु प्रदूषण से बहुत कम अथवा न के बराबर दुष्प्रभाव, बचाव के उपायों की आवश्यकता नहीं
खराब
201-300
91-210
संवेदनशील वर्ग
सांस संबंधी परेशानी बढ़ने का खतरा, लम्बे समय तक अथवा भारी काम करने से बचें
आम जनता
किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत महसूस होनी शुरू हो सकती है ।
बहुत खराब
301-400
211-252
स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी, किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गम्भीर दुष्प्रभाव पड़ सकता है । साँस के रोगों में वृद्धि हो सकती है ।



संवेदनशील वर्ग
लम्बे समय तक बाहर रहने और भारी काम करने से बचें
आम जनता
लम्बे समय तक बाहर रहने और भारी काम को कम करें
गम्भीर/संकट पूर्ण
401-500
253+
स्वास्थ्य चेतावनी । आम लोगो को भी सांस के रोग होने का खतरा,   हर व्यक्ति को चाहिए कि वह खुले में काम करने से बचे, संवेदनशील व्यक्ति घर में ही रहे और शारीरिक काम कम से कम करें ।

सिस्टम और एयर क्वालिटी फोरकास्टिंग एण्ड रिसर्च (SAFAR-India) वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन 2015 से प्राप्त

संवेदनशील वर्ग
बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ, श्वसन एवं हृदय रोग से ग्रसित व्यक्ति ।

हम स्वयं को घर में कैसे सुरक्षित रख सकते हैं ?
अन्तर्राष्ट्रीय अध्ययनों से इस बात का पता चलता है कि HEPA फिल्टर युक्त वायु शुद्ध करने वाले यन्त्र (एयर प्यूरिफायर) काफी कारगर हैं, विशेष रूप से अस्थमा के रोगियों को रात में होने वाली परेशानियों में इनसे काफी आराम मिलता है । अन्य प्रकार के एयर प्यूरिफायर भी लाभदायक हो सकते हैं । हालांकि ओजोन पैदा करने वाले एयर प्युरिफायर से बचना चाहिए चूँकि इनसे ओजोन के दुष्प्रभावों का खतरा भी रहता है । सुबह और शाम को खिड़कियाँ बंद रखी जाएँ और दिन के समय जब प्रदूषण का स्तर तुलनात्मक रूप से कम हो तब घर के दरवाजे-खिड़की खुली रखी जाएँ । HEPA फिल्टर युक्त ए.सी. का प्रयोग भी कुछ हद तक बचाव करता है ।
हम स्वयं को घर से बाहर कैसे सुरक्षित रख सकते हैं ?
घर से बाहर किस प्रकार की सावधानी लेनी चाहिए यह बाहर के प्रदूषण के स्तर पर निर्भर करता है। बाँयीं तरफ दी गयी टेबल इसमें मददगार होगी । N95 एवं N99 मास्क के प्रयोग से बाह्यक्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है । वर्तमान परिस्थितियों में डिस्पोज़ेबल मास्क दो सप्ताह से अधिक नहीं पहने जाने चाहिए । धुल सकने वाले मास्क में भी जब सांस लेने में परेशानी होने लगे तो उन्हें नहीं पहनना चाहिए क्योंकि यह भी छनने की संतृप्तता का संकेत हो सकता है । नेज़ल फिल्टर एक अन्य विकल्प है जो कुछ राहत दे सकता है ।

यात्रा के दौरान मैं अपने को वायु प्रदूषण से कैसे बचा सकता हूँ?
यातायात के सार्वजनिक साधनों जैसे मैट्रो आदि में मास्क प्रदूषण से बचाता है और भीड़ भरे वातावरण में होने वाले संभावित संक्रमण का सुरक्षा कवच भी है । कारों और अन्य निजी वाहनों में ए. सी. को रि-सर्कुलेशन मोड पर डालने से भी हवा की गुणवत्ता में कुछ सुधार होता है ।

मुझे चिकित्सक की सलाह कब लेनी चाहिए
यदि निम्न प्रकार का कोई भी लक्षण महसूस होता है तो चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिएः- सांस लेने में परेशानी और घरघराहट, छाती में जकड़न और पसीना आना, रक्त-चाप में उतार-चढ़ाव, धड़कन बढ़ना, चक्कर अथवा मूर्च्छा आदि ।

साभार

डॉ. जे.के. सैनी, डॉ. सजल डे, डॉ. अनुराधा शुक्ला, डॉ. वरूण काकड़े एवं हिंदी विभाग, डॉ रा. म. लो. हस्पताल। 

Sunday, October 23, 2016

अन्तर्द्वन्द्व : एक नाटिका

अन्तर्द्वन्द्व : एक नाटिका

Characters:
1. Main (मैं )
२. आत्मा
३. अन्तरात्मा
४. गुरु
५, भगवान
६. समाज
7.दोस्त
८. आकांक्षा

Enter मैं
" मैं, मैं हूँ। एक middle class professional गृहस्थ। मैं चाहता हूँ की मैं खुश रहूँ, और अक्सर रहता भी हूँ।  पर जब मैं अपने दोस्त को देखता हूँ (Enter dost, on the other side of the stage,  wearing executive suit, wears goggles on stage facing audience and doing business as 'main' speaks)(Main looking at 'dost')
तो कहीं एक हीनता की भावना पैदा होती है।  मैं क्यों नहीं उसके जितना समृद्ध हूँ? मेरे पास वो सब क्यों नहीं जो उसके पास है?
Dost moves towards 'main' and talks to him
Dost "और क्या हाल हैं?" (बैकग्राउंड से आवाज़ आती है "अभी त्तक तो ठीक ही थे ")" अरे यार, इस बार new york मैं बड़ा मज़ा आया, बच्चों ने छुट्टियाँ बहुत एन्जॉय कीं, हम तो एग्जीक्यूटिव क्लास से गए, best 5 star mien ruke aur niagra falls bhi dekh liya! Tu bhi to kahin jaane wala tha??"
Main "हम्म्म! हम तो यार वो, क्या है की, वो बीवी के मायके गोंडा चले गए थे, बस कहीं और जाने का समय ही नहीं मिला!"
दोस्त " बढ़िया है, बढ़िया है, तेरे तो पैसे बच गए यार! चल मैं चलता हूँ!" (dost leaves the stage)
Main to the audience " मेरी भी इच्छाएं हैं, मैं भी चाहता हूँ की मैं बहुत सक्सेसफुल हूँ, सब मुझे भी आदर भाव से देखें, मेरी भी आकांक्षा है........ "
a girl enters the stage, comes and holds his hand and starts pulling him
Main "अरे तुम कौन हो??"
गर्ल " आकांक्षा!"
मैं " कौन आकांक्षा??"
आकांशा "तुम्हारी अकांक्षा.... "
मैं " अरे धीरे बोलो, कहीं मेरी बीवी ने सुन लिया तो!!"
आकांक्षा " मैं तुम्हे ले जाने आई हूँ, बहुत दूर, बहुत ऊँचे, जहाँ तुम जाना चाहते हो।  जहाँ तुम हमेशा खुश रहोगे!"
मैं (हाथ झिड़कते हुए) " हटो! ऐसी कोई जगह नहीं होती जहाँ कोई हमेशा खुश रहता है।  मुझे उल्लू मत बनाओ" (बैकग्राउंड से 'नो उल्लू बनायोइंग, नो  उल्लू बनायोइंग"
आकांक्षा मायूस हो चली जाती है!
Main to audience " मैं भी इतना बेवक़ूफ़ नहीं हूँ! मैं भी पैसे कमाने के तरीके जानता हूँ! आखिर मुझे भी तो अपने परिवार को खुश रखना है।  कल मैंने भी एक आदमी को चूना लगाया और कुछ पैसे बना लिए!" (develop and connect with atma mar chuki hai)
Enter atma " Hu ha hahahahaa"
main " तू कौन है?? राक्षस ?"
आत्मा (ज़ोर से) "बेवकूफ!  आत्मा को राक्षस बोलते हो, अगर मैं राक्षस हूँ, तो तुम्ही राक्षस हो जाओगे। मैं हूँ तुम्हारी आत्मा !"
मैं " पर मुझे तो कल किसी ने बोला की तुम्हारी आत्मा मर चुकी है, फिर  तुम…?"
आत्मा "मूर्ख! आत्मा अजर अमर है, मैं न पैदा होता हूँ, न मुझे कोई मार सकता है! अरे गीता नहीं पढ़ी तो कम से कम सीरियल तो देखे होंगे "
मैं " जब भी मैं पैसों की बात करता हूँ तुम कहाँ से टपक पड़ते हो?"
आत्मा " हु हाहाहाहा ! मैं कोई फल नहीं जो टपकुं, मैं तो तुम्हारे अंदर ही हूँ "
stage par ek flashy dress mein ladki muskurate aur gestures karte hue
Main uski taraf bhagne lagta hai
Atma "kahan ja rahe ho?/"
main " wo dekho aishwarya"
Atma " kaun aishwarya rai?"
Main " nahin! aishwarya, sare sukh, aish,aram"
Atma exits (why? atma ko aishwarya - aisho-aram se kya kaam, atma ko agni jala nahi sakti, vayu sukha nahin sakti aur asihwarya lubha nahin sakti...)
Antaratma ( a girl) enters and holds back main
Main ' ab tum kaun ho?"
Antaratma '" main tumhari antaratma"
Main " wo to pehle hi aa chuki hai na"
antaratma " nahin wo to atma thi, main antaratma hoon!'
Main ' lekin tum to ladki ho, tum meri antaratma kaise ho sakti ho?"
Antaratma " antaratma hoti hai, hota nahin isliye main to ladki hi hoon!"
main " par atma bhi to hoti hai, hota nahin, to wo phir ladka kaise tha, thi, whatever!"
Antaratma " arre atma to unisex hai, kisi main bhi ghus sakti hai, "
Main " to tum bisexual ho?"
antaratma " isiliye tumhari biwi kehti hai ki tum hamesha sex ke baare mein hi sochte rehte ho.main antaratma hoon, tumhara man, tumhari soch!"
Main " confuse mat karo, tumhari anatomy galat hai, tum mera heart ho ya brain ho???"
Antaratma "मैं तुम्हारी वैल्यूज हूँ, जो सही हैं, तुम्हें गलत काम करने से रोकती हैं"
मैं "तो तुम कल कहाँ थीं?"
अंतरात्मा "कल मेरा ऑफ था! क्यों तुमने कोई गलत काम किया? पर 'आत्मा' तो कॉल पर थी!
आत्मा झुंझलाते हुए एंटर करती है
आत्मा " आत्मा कॉल पर थी का क्या मतलब है, मैं तो 24 बाई 7 कॉल पर हूँ, ज़िन्दगी भर और इवन उसके बाद भी, मैं किस किस का काम देखूँ, एक इंडिविजुअल पर इतना काम होगा तो क्वालिटी तो सफ़र करेगी ही! जो गलत काम कर रहा है उसका कुछ नहीं, सारा blame मुझ पर ही क्यों? इसको बोलो ..."
अंतरात्मा "तो क्या किया तुमने कल ?"
मैं " उससे तुम्हें क्या मतलब, तुम्हें बताया तो ज़िन्दगी भर तुम मुझे कोसती रहोगी! वैसे तुम्हारी वेकेशन्स नहीं होती क्या?"
अंतरात्मा " लगता है तुम मुझे मार ही डालोगे, और क्या करना चाहते हो?"
मैं "चाहता तो बहुत कुछ हूँ, पर तुम करने दो तब न, करप्शन के टाइम तुम्हारा ऑफ हो जाता है, पर जब ऐश्वर्या आती है तो तुम सबसे अलर्ट हो जाती हो??"
अंतरात्मा "तो ये बात है!! ये तो अपनी-अपनी नेचर है, मेरी अपब्रिंगिंग में मोरल वैल्यूज ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट हैं, छोटा मोटा करप्शन फिर भी चलता है"
मैं " तो तुम मेरे दोस्त को क्यों नहीं रोकतीं ?'
अंतरात्मा " मैं तुम्हारी अंतरात्मा हूँ, उसे कैसे रोकूंगी? उसे तो उसकी अंतरात्मा को रोकना चाहिए, लेकिन उसकी अंतरात्मा की वैल्यूज अलग हैं, इसलिए वह उसे नहीं रोकती!"
मैं " तो तुम उसकी अंतरात्मा बन जायो और उसकी वाली मुझे  भेज दो"
अंतरात्मा" ऐसे थोड़े ही होता है,   मैं तो तुम्हारे साथ ही बड़ी हुई हूँ और तुम्हारे साथ ही रहूंगी!!" (develop)
मैं "कोई ज़बरदस्ती है? तुम्हारे ऊपर कौन है, मुझे उससे बात करनी है ? ये आत्मा ??"
अंतरात्मा "नहीं ये तो सिर्फ डे टू डे functioning के लिए है, मेरे ऊपर तो बस भगवान् है??
मैं "ठीक है, बुलायो भगवान को, अभी तुम्हारी ट्रांसफर कराता हूँ!"
आत्मा " भगवान् अवेलेबल नहीं हैं, अभी मैं ही इंचार्ज हूँ!" (develop)
मैं" वैसे कहते हैं, भगवान् कण कण में है पर ज़रुरत के टाइम ऑलवेज नॉट-अवेलेबल, क्या फायदा ऐसे भगवान् का?"
आत्मा "अंतरात्मा चेंज नहीं होती, ऐसा कोई लॉ है ही नहीं?"
मैं "तुम झूट बोलते हो!"
आत्मा (चिल्लाते हुए) " आत्मा झूट नहीं बोलती, हुहहहहह !!"
मैं " तो फिर अर्जुन, जो शुरू मैं इतना ऑनेस्ट था बाद में इतना अय्याश कैसे हो गया?"
आत्मा " उसकी अंतरात्मा तो मर गयी थी, और फिर वो पोजीशन vacant थी, हमने कॉन्ट्रैक्ट पर रखने की कोशिश की थी पर...... फुल्ली डेवलप्ड अच्छी अंतरात्मा आजकल मिलती कहाँ है?? तुम तो खुश किस्मत हो जो तुम्हें ऐसी अंतरात्मा मिली"
मैं " तो क्या मुझे ऐशो आराम का कोई हक़ नहीं है? इतना डिस्क्रिमिनेशन क्यों है?"
ऐश्वर्या "ओह, मुझे तो यहाँ suffocation हो रही है, जहाँ लोग इतना सोचते हैं, मैं तो वहां जाती ही नहीं हूँ! मुझे डिबेट बिलकुल पसंद नहीं है और मैं उससे दूर ही रहती हूँ!"
मैं (आत्मा और अंतरात्मा से) " तुम दोनों यहाँ से जायो, कहीं तुम्हारे चक्कर में ऐश्वर्या चली न जाये!!"
आत्मा "बेवक़ूफ़, मैं चला गया तो तुम मर जायोगे!'
मैं " ठीक है, फिर नज़र मत आयो, तुम तो नोर्मल्ली भी नज़र नहीं आते न !"
आत्मा "अरे तुम अच्छे आदमी हो, क्यों बुराई की तरफ भाग रहे हो, वह देखे तुम्हारी अंतरात्मा कराह रही है और मरने वाली है, उसे बचायो!"
अंतरात्मा छटपटाने लगती है और मूर्छित हो जाती है!
मैं "अब कुछ अच्छा लग रहा है!!"
आत्मा ' इसको कौन समझायेगा, लगता है गुरु को बुलाना पड़ेगा"
गुरु enters
आत्मा (गुरु से ) " गुरु जी इसे बचाइए! ये अपनी अंतरात्मा को मार ऐश्वर्या की आग़ोश में खो जाना चाहता है"
गुरु (मुस्कुराते हुए) "वत्स तुम चिंता मत करो! ये मिडिल क्लास आदमी है, ये सिर्फ ऐश्वर्या के बारे में सोच सकते हैं, ये जैसे ही उसके पास जायेगा इसकी अंतरात्मा फिर जाग जाएगी, ये फीडबैक लूप मिडिल क्लास में शुरू से ही इन्सटाल्ड होता है, इसको बाई-पास नहीं कर सकता"
आत्मा " तो फिर ये इतना शोर क्यों मचा रहा है ??"
गुरु " कभी-कभी सिस्टम में वायरस आ जाता है और वो हाई क्लास को imitate करने लगता है, पर ये ऐश्वर्या वाला app इसके सिस्टम से कम्पेटिबल ही नहीं है!"
अंतरात्मा थोड़ा उठने लगती है
तभी मैं आक्रामक हो उठता है और अंतरात्मा का गाला घोटने लगता है, गुरु और आत्मा उसे छुड़ाने की कोशिश करते हैं, ऐश्वर्या ज़ोर से हँसने लगती है!
अंतरात्मा निढाल हो जाती है, मैं गुरु को धकेल कर ऐश्वर्य की तरफ दौड़ता है और उसका हाथ पकड़ लेता है और ऊंचे स्वर में बोलता है
"आखिर मैंने ऐश्वर्या को प्राप्त कर ही लिया, चाहे इसके लिए मुझे इस अंतरात्मा को मारना पड़ा" और अंतरात्मा की तरफ इशारा करता है पर अंतरात्मा गायब है !
"अरे, ये अंतरआत्मा की लाश कहाँ गयी, आत्मा भी नज़र नहीं आ रही"
गुरु दूसरी तरफ मुहँ  कर के बैठ जाते हैं
"इससे पहले कुछ गड़बड़ हो, मैं ऐश्वर्या के साथ भाग जाता हूँ!"
और वो ऐश्वर्या का हाथ पकड़ भागने लगता है, तभी सामने से चार-पांच लोग उसे घेर लेते हैं और घूमने लगते हैं
मैं "तुम कौन हो?"
"हम समाज हैं!"
"मुझे क्यों रोका है?"
"तुम तो मिडिल क्लास हो??"
"तो??"
"तो तुम्हें ऐश्वर्या कहाँ से मिल गयी ?"
"क्यों क्या मुझे ऐश्वर्या का हक़ नहीं ?"
हँसते हुए "हक़?? वो क्या होता है? हक़ तो उन तोहफ़ों को बोलते हैं, जो जब हमारा मन करता है, हम तुम्हें दे देते हैं, उससे हमारी इमेज अच्छी  बनी रहती है।  वो छोड़ो, ये बतायो तुमने क्या गलत किया है जो ये तुम्हें मिल गयी?"
"नहीं मैंने कुछ गलत नहीं किया, इस पर मेरा भी हक़ है"
"चलो मान लेते हैं पर तुम्हें पहले इसे अर्जित करना होगा!!"
"जब मैंने इसे प्राप्त कर लिया तो earn  करने का क्या  मतलब, कैसे ?"
"मेहनत से, लगन से, ईमानदारी से"
"वो तो मैं बचपन से करता हूँ, उससे नहीं मिलती "
"वही तो हम कह रहे हैं , तो तुम्हें कैसे मिली??"
"ये खुद मेरे पास आयी!!"
इतने में दोस्त आता है और ऐश्वर्या का हाथ छुड़ा कर ले जाता है! मैं और समाज बातों में उलझे हैं
"अब तुम्हें मानना होगा कि ऐश्वर्या तुम्हारी नहीं है !"
"शायद तुम ठीक कहते हो,"
इतने में समाज में से अंतरात्मा निकल कर आती है और अपना मुखौटा उतार मैं का हाथ पकड़ लेती है !
अंतरात्मा"तुमसे मुझसे कोई नहीं छीन सकता, ऐश्वर्य भी नहीं, क्योंकि जब तक तुम हो तब तक मैं रहूंगी। हो सकता है, तुम मेरी न सुनो, अपनी आत्मा की न सुनो, गुरु की भी न सुनो पर तुम्हें इस समाज में रहना है और ये समाज ही मेरा पोषण करता है, इसलिए मैं सदा तुम्हारे साथ हूँ"
"तो फिर आकांक्षा और ऐश्वर्या से कह दो कि मुझे कभी नज़र न आयें !"
अंतरात्मा "आकांक्षा तो हमेशा तुम्हें नज़र आएगी, उसी से तुहें अपने चलने की दिशा मिलेगी और ऐश्वर्या सदा दूसरों के साथ नज़र आएगी, तुम्हें अपने ऊपर ही संयम रखना होगा"
to be completed......


मैं " मेरी तो आकांक्षा ही ऐश्वर्या है?"
अंतरात्मा " तो फिर कोई प्रॉब्लम नहीं, तुम अपनी आकांक्षा को ही ऐश्वर्या समझो, वैसे भी अच्छी गुड लुकिंग है और ऐश्वर्या के पीछे मत भागो!"
मैं " नहीं मेरा मतलब है, की मैं तो ऐश्वर्या को ही प्राप्त करना चाहता हूँ !"
समाज, आत्मा, अंतरात्मा - सब एक साथ " झूठ, सफ़ेद झूठ" सब गाने लगते हैं " कि मैं झूठ बुलेया - हांजी , की मैं कुफ़र टोलिया - हाँ जी, भई हाँ जी "
मैं -" नहीं मैं सच बोल रहा हूँ!!"
आत्मा (हँसते हुए) - " तुम तो जानते ही नहीं की सच क्या है और झूठ क्या , वो तो मैं जानता हूँ, जिस दिन तुम्हें सच का ज्ञान हो गया उस दिन तुममे और मुझमें कोई फरक नहीं रह जाएगा ! तुम्हें तो ऐश्वर्या चाहिए ही नहीं, वो तो दोस्त को देख कर तुम्हें लगता है कि तुम्हें ऐश्वर्या चाहिए"
मैं " मैं नहीं मानता, तुम ये कैसे कह सकते ?"
आत्मा " मेरे पास खुशीमीटर है! तुम्हारा दोस्त जब वर्ल्ड ट्रिप कर के आया तो उसकी ख़ुशी की जो रीडिंग थी, उससे ज़्यादा वैल्यू तो जब तुम बचपन में लूडो खेलते थे तो ही आ जाती थी"
में " बचपन की बात अलग हैं, बच्चों को तो छोटी -छोटी चीज़ों से बड़ी खुशियाँ मिल जाती हैं पर अब मैं बड़ा हो गया हूँ, अब मुझे भी ख़ुशी लिए वो सब चाहिए जो बड़ों को चाहिए होता है"
आत्मा " ये ठीक कहा, बड़ों की ख़ुशी मीटर की रीडिंग्स गेनेराल्ल्य बच्चों से कम ही आती है, पर उस दिन जब तुम अपने बेटे के साथ खेल रहे थे तो काफी अच्छी वैल्यू दिखा रहा था ख़ुशी मीटर !"

बे-इश्क़

ज़िन्दगी इतनी भारी तो कभी न थी
रोज़ ही सुबह तकिये का वज़न बढ़ जाता है!
जबसे देखी है सीरत तेरी,
अब कहाँ सूरत-ए-हुस्न पे प्यार आता है!!
गयी-गुज़री ही गुज़र गयी
लगता है देखकर अब तुझको ऐ ह्यात,
इससे ज़्यादा भी जूझ लेते हैं लोग
 न होगी हममें ही शायद कोई बात!
तेरे ज़ुल्मों ने पाला समंदर मेरी आँखों में
इनको कैसे बाँध लूँ बातों  के बांधों में!
मुझसे मेरा फ़र्ज़ मांगते हैं सभी
ज़िन्दगी एक क़र्ज़ की तरह चुकाए जाता हूँ!
ख़्वाहिशें कभी उठातीं है सर 
तो सजदे में तेरे उनको भी झुकाये जाता हूँ!
किस दिन इस सज़ा से निजाद होगी 
कब इस मुश्किल का हल हो जायेगा?
कज़ा से पहले भी ये मुमकिन है,
शायद उसी रोज़ 
जब  मुझे तुझसे इश्क़ हो जायेगा!

who's foible?

What kind of addiction is this?
Addicted to another human being!
like a parasite
one sided
still justified!
The addict is restless
till he is satiated
and chattel
is helpless
not because
it is bound
but because
it is justified!

The addict suffers
if not contented
and the chattel
if he is!
who's foible is it?
somebody else's
not theirs!!

Monday, September 26, 2016

मृत्यु या मुक्ति!!

मृत्यु या मुक्ति!!
मानवों में से आधे हम हैं,
अचरज है!
फिर भी न समझे इंसान कोई,
हमारा कोई चिन्ह, न निशान कोई,
न वर्ग, न रंग, न पहचान कोई,
हर श्रेणी में हैं हम,
आंको न खुद से कम,
लगानी पड़े अब
चाहे जो युक्ति
लेकर रहेंगे

मृत्यु या मुक्ति!!


Sajeev ant!

सजीव अंत - चले जाने के बाद भी ! सीमित है समय जितनी चलनी है जीवन लय पर याद रहूँ मैं सदा जाने के बाद भी,  इसीलिए कुछ करना चाहता हूँ जीते हु...